कामागाटामारू प्रकरण इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि कामागाटामारू प्रकरण ने पंजाब में विस्फोटक स्थिति पैदा कर दी थी। सिंगापुर में रहने वाले सरदार बाबा गुरदीप सिंह ने जापान के 'कामागाटामारू
जहाज' को किराए पर लिया।इसमें रोजगार के इच्छुक भारतीयों को कनाडा ले जाया गया। इस जहाज में 351 पंजाबी सिख एवं 21 मुसलमानों को सिंगापुर से कनाडा के बैंकूवर ले जाया जा रहा था इन्हें कनाडा भेजने का उद्येश्य था कि ये लोग कनाडा में रोजगार प्राप्त करें तथा आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेंं परंतु जहाज के कनाडा पहुचंने से पहले ही प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हो गयी इस कारण यात्रियों को बंदरगाह पर उतरने नहीं दिया गया। मजबूरन जहाज को कलकत्ता के लिए रवाना किया गया। यह जहाज 27 सितंबर 1914 को कलकत्ता बंदरगाह पर पहुंचने पर ब्रिटिश सरकार को यह शक था कि जहाज में क्रांतिकारी भरे हुए हैं। अतः ब्रिटिश सरकार ने सभी यात्रियों को गिरफ्तार करके पंजाब भेजने का प्रयत्न किया परंतु यात्रियों एवं पुलिस में मुठभेड़ हो गयी जिसमें 22 लोग मारे गए। बाबा गुरदीप सिंह बचकर भाग निकले तथा बाकी बचे लोगों को विशेष ट्रेन के द्वारा पंजाब भेज दिया गया। यह घटना कामागाटामारू या दम-दम प्रकरण के नाम से जानी जाती है।
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