अहोम विद्रोह
- 1828ई० में "गोमधर कुंअर" के नेतृत्व में विद्रोह की शुरुआत असम राज्य में हुई।
- बर्मा युद्ध के उपरांत ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किए गए वादे को पूरा नहीं करने के कारण विद्रोह शुरू हुआ।
- विद्रोहियों ने रंगपुर पर चढाई की योजना बनाई परन्तु कम्पनी ने बल का प्रयोग करके विद्रोह को दबा दिया और राज्य का विभाजन कर दिया।
अंग्रेज़ों के विरुद्ध अहोम विद्रोह 1828 ई. में किया गया था। असम के 'कुली' वर्ग के व्यक्तियों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर बर्मा युद्ध के समय किये गये वायदे से मुकरने का आरोप लगाया। अंग्रेज़ों ने अहोम प्रदेश को अपने साम्राज्य में मिलाने का प्रयास किया। अहोमों ने अंग्रेज़ों के इस प्रयास को विफल करने के लिये 1828 ई. में 'गोमधर कुंअर' के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया तथा रंगपुर पर चढ़ाई की योजना बनाई। अंग्रेज़ी सेना इस विद्रोह पर नियंत्रण पाने में असफल रही। 1830 ई. में अहोमों द्वारा दूसरे विद्रोह की योजना बनाई गयी। इससे पहले की विद्रोह होता, कम्पनी ने शान्ति की नीति अपनाते हुए उत्तरी असम के प्रदेश महाराज 'पुरन्दर सिंह' को दे दिये और विद्रोह शांत हो गया।
जवाब देंहटाएंArya Yaduvanshi - 8909370570
जवाब देंहटाएंअंग्रेज़ों के विरुद्ध अहोम विद्रोह 1828 ई. में किया गया था। असम के 'कुली' वर्ग के व्यक्तियों ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर बर्मा युद्ध के समय किये गये वायदे से मुकरने का आरोप लगाया। अंग्रेज़ों ने अहोम प्रदेश को अपने साम्राज्य में मिलाने का प्रयास किया। अहोमों ने अंग्रेज़ों के इस प्रयास को विफल करने के लिये 1828 ई. में 'गोमधर कुंअर' के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया तथा रंगपुर पर चढ़ाई की योजना बनाई। अंग्रेज़ी सेना इस विद्रोह पर नियंत्रण पाने में असफल रही। 1830 ई. में अहोमों द्वारा दूसरे विद्रोह की योजना बनाई गयी। इससे पहले की विद्रोह होता, कम्पनी ने शान्ति की नीति अपनाते हुए उत्तरी असम के प्रदेश महाराज 'पुरन्दर सिंह' को दे दिये और विद्रोह शांत हो गया।
1830 में आहोम विद्रोह के नेतृत्वकर्ता कौन थे
हटाएंGomdhar kuwanr
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