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राष्ट्रीय वन नीति एवं भारत वन रिपोर्ट, 2017

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       भारत में सर्वप्रथम 1894 ई० में वन नीति का निर्माण किया गया था। जिसमें सन् 1952 एवं 1988 में संशोधन किया गया है।वर्तमान वन नीति वनों की सुरक्षा, संरक्षण एवं विकास पर जोर देती है। ' राष्ट्रीय वन नीति 1988 ' के अनुसार भारत में 33% वन छेत्र की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है।नीति के अनुसार पर्वतीय छेत्रों में 60% छेत्र एवं मैदानी छेत्रों में 20% छेत्र को वनाच्छादित करने की आवश्यकता है। देश मे 2015 तक 33% वन छेत्र की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया था परंतु अभी तक यह लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका है। वर्तमान समय में देश का 24.39% भौगोलिक छेत्र ही वन आच्छादित है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा मसौदा वन नीति ,2018 जारी की गई है। इस नीति को पिछली नीतियों में रहने वाली कमियों एवं वर्तमान समय की पर्यावरण एवं आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। भारत में वनों की वर्तमान स्थिति           भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survay Of India -FSI) भारत में वनों की स्थिति ...

भारत में वनों का वर्गीकरण

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  भारत एक विशाल छेत्रफल पर फैला हुआ भिन्न-भिन्न जलवायु एवं मृदाओं वाला देश है। इसलिए भारत में उष्णकटिबंधीय प्रकार से लेकर टुंड्रा प्रकार जैसी विविध वनस्पतियां पाई जाती है।जोकि पर्यावरण एवं आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत में पायी जाने वाली वनस्पतियों को विभिन्न वर्गों में बांटा गया है जो कि निम्नवत हैं:- 1. उष्णकटिबंधीय सदाहरित वन-  ऐसे वन 200 सेमी. से अधिक वर्षा वाले छेत्रों में पाए जाते हैं। इस प्राकार के वनों की लकड़ियां विषुवतिय वनों की तरह कठोर होती हैं एवं इनकी ऊंचाई 60 मीटर से अधिक होती है। इनमें मुख्यत: महोगनी, आबनूस, जारूल, बांस बेंत,सिनकोना एवं रबर जैसे बहुउपयोगी वृक्ष पाये जाते हैं। पश्चिमी घाट के ऊत्तरी छेत्रों में इन वनों को 'शोलास वन ' के नाम से जाना जाता है।भारत में यह वन पश्चिमी घाट, शिलांग का पठार, लक्ष्यद्वीप एवं अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह का 95% भाग इस प्रकार के वनों से ढका है। 2. उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन- ये वन 100 से 200 सेमी. वर्षा वाले छेत्रों में पाए जाते हैं। सांगवान, सखु...

सावंतवादी विद्रोह

सावंतवादी विद्रोह की शुरुआत एक मराठा सरदार फोण्ड सावंत के नेतृत्व में सन 1944 में हुई। इन्होंने कुछ सरदारों तथा देसाइयों की सहायता से कुछ किलों पर अधिकार कर लिया था। बाद में अंग्रेज सेना ने इन विद्रोहियों को मुठभेड़ के पश्चात परास्त कर दिया और सावंतों के अधिकार वाले किलों को कब्जे में लेकर सावंतों को किले से बाहर खदेड़ दिया। कुछ विद्रोही जान बचाकर गोवा भाग गये थे और बचे हुए विद्रोहियों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।

भारत का नामकरण कैसे हुआ

भारत एक महान देश है।यहां की सभ्यता एवं संस्कृति उतनी ही पुरानी है जितना कि मानव की उत्पत्ति। भारत की विशालता के आधार पर इसे उपमहाद्वीप की संज्ञा दी गई है। भारत का प्राचीन नाम आर्यावर्त था। राजा भरत के नाम पर इसका नाम भारतवर्ष पड़ा। वैदिक आर्यों का निवास स्थान सिंधु घाटी में था। पर्शिया (वर्तमान ईरान) के लोगों ने सबसे पहले सिंधु घाटी से भारत में प्रवेश किया। वे लोग 'स' का उच्चारण 'ह' की तरह करते थे तथा वे सिंधु नदी को हिन्दू नदी कहते थे। इसी आधार पर उन्होने सर्वप्रथम भारत को हिंन्दुस्तान नाम दिया। ये लोग सिन्धु का बदला रुप हिन्दु यहां के निवासियों के लिए भी प्रयोग करते थे।जैन पौराणिक कथाओं के अनुसार हिन्दू और बौद्ध ग्रन्थों में भारत के लिए जम्बूद्वीप शब्द का प्रयोग किया गया है। भारत के लिए प्रयुक्त इंडिया शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के इण्डोस से हुआ है। यूनानियों ने सिंधु को इंडस तथा इस देश को इंडिया कहा। जेम्स अलेक्जेंडर ने अपने विवरण में हिन्दू का ह हटाकर देश को इंदू नाम से संबोधित किया था। बाद मे परिवर्तित होकर यह इंडिया हो गया।भारत के संविधान के अनुच्छेद-1 भारत...

आयुष्मान भारत योजना,Ayushman Bharat Yojna 2018 will start on 25 sept 2018

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आयुष्मान भारत योजना                   वित्त मंत्री अरुण जेटली जी ने केन्द्रीय बजट 2018-19 में  आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की थी इसके तहत 10 करोड़ भारतीय परिवारों को 5 लाख रुप्ये की बीमा सुविधा प्रदान की जायेगी। योजना की शुरुआत 25 सितंबर 2018 को पं० दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्म दिवस पर हो जायेगी। क्या है आयुष्मान भारत योजना      जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस पर केन्द्र सरकार द्वारा किया जायेगा। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले पर अपने भाषण में की। इस योजना के द्वारा सीधे 10.74 करोड़ परिवारों के लगभग 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुप्ये तक के इंश्योरेंश की सुविधा मिलेगी। सुविधा पाने वाले लाभार्थी सरकारी अथवा निजी दोनो प्रकार के अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। इस योजना से हालांकि अभी 8 राज्यों एवं केन्द्र शासित राज्यों को बाहर रखा गया है। इन आठ राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में योजना को लागू करने में आने वाली समस्याओं को दूर क...

सुकन्या समृद्धि योजना

Latest News-   सुकन्या समृद्धि योजना के तहत न्यूनतम जमा राशि को 1000 रुप्ये से घटाकर 250 रुप्ये प्रति वर्ष कर दिया गया है। Sukanya   Samridhi Yojna - सुकन्या समृद्धि योजना भारत में बालक- बालिकाओं के बढते लिंगानुपात को रोकने एवं बालिकाओं को उच्च शिक्षा तथा विवाह के लिए धन जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री जी की 'बेटी बचाओ,बेटी पढाओ' मुहिम के तहत 22 जनवरी 2015 को शुरु की गयी थी। इस योजना के तहत किसी भी भारतीय परिवार के द्वारा अपनी प्रथम दो बालिकाओं के लिए किसी भी डाकघर या वाणिज्यिक बैंक में खाता खुलवाया जा सकता है। खाता खोलने के लिए बालिका की आयु जन्म से लेकर 10 वर्ष तक हो सकती है।इस योजना के अंतर्गत केवल बालिका के प्राकृतिक या कानूनन अभिभावक ही खाता खुलवा सकते हैं तथा एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम 250 रुप्ये से लेकर 1,50,000 रुप्ये तक जमा किए जा सकते हैं। सामान्यत: एक अभिभावक के द्वारा दो ही बालिकाओं का खाता बैंक या डाकघर में खुलवाया जा सकता है परंतु कुछ विशेष शर्तों के साथ तीसरा खाता भी खुलवाया जा सकता है यह भी पढें- भगौड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक,2018 मु ख्य तथ्य ...

खिलाफत या असहयोग आंदोलन क्या है ?

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                     प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात भारत में ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो गयीं कि भारतीयों को अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ा। सन 1919 से 1922 तक दो महत्वपूर्ण आंदोलन चलाये गये। ये आंदोलन थे - खिलाफत आंदोलन एवं असहयोग आंदोलन। हालांकि खिलाफत आंदोलन भारतीय राजनीति से प्रत्यक्ष रुप से संबद्ध नहीं था परंतु इस आंदोलन ने हिन्दु- मुस्लिमों को भेदभाव मिटाकर एकजुट होकर आंदोलन करने के लिए प्रोत्साहित किया।   खिलाफत आंदोलन के उदय का कारण                                                  प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात तुर्की के प्रति ब्रिटिश शासन के रवैये से सम्पूर्ण विश्व के मुसलमान आक्रोशित हो उठे। प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की ने ब्रिटेन के विरुद्ध जर्मनी एवं आस्ट्रिया का साथ दिया था। अत: ब्रिटेन ने तुर्की के प्रति कठोर रवैया अपनाया। तुर्की के साथ  'सेब्र...